जिला - कोरबा
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - अंधेरा
विद्या - गीत
संपर्क - 93 99 432577
*अंधेरा*
अंधेरा क्यों ? तू अंधेरा है, छाया हर तरफ, कहेर तेरा है।
रोशनी से ,क्यों ? है दुश्मनी , देख सुनसान शहर तेरा है।।2।।
प्रकाश से, कर जरा दोस्ती ,खौफ से भरा, तेरा हर पहर है।
अंधेरे से , है डर लगता, अंधविश्वास का फैला जहर है ।।
चोर डाकू झूठ फरेब, तेरे आंगन में फले फूले। अत्याचार और बेईमानी, रिश्वत के, झूले में झूले।।2।।
अंधेरे तेरे ही कारण से, छोटी सी आहट से भय लगता ।
सत के प्रकाश ,के दम से, हम सबको है बल मिलता ।।
अंधेरा क्यों ? घमंड इतना ,क्यों लोगों को भटकता है।
उजाला से, तू डरता है, देखते ही छुप जाता है।।2।।
अंधेरा क्या? तेरी हैसियत है ,जो उजाले को मिटाएगा ।
खुद पल मे मिट जाएगा, उजाला जो पास आएगा।।
नहीं प्यारा, किसी को तुम, तुझे सब दूर भागते हैं ।
उजाले के ,दम पर ही तो, खुशियां सब घर बुलाते हैं ।।2।।
अंधेरा क्यों तू..........।।
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