जिला- रायगढ़
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- वृक्ष
शीर्षक -"वृक्ष का प्रभाव"
विधा- कविता
मोबाइल नंबर 93032 9894
*वृक्ष का प्रभाव*
तापित हो गई है धरा,
मानवों के करतूत से।
हरियाली विरल हो गई है,
वृक्षों की पतंग से।
अनियमित वर्षण हो रही है,
अनिश्चित समय में ।
कहीं अति वृष्टि हो रही,
कहीं अनावृष्टि धरा में।
व्यवस्था बिगड़ गई है ,
अव्यवस्था में जीना दुभर है।
ऋतु संतुलन बिगड़ गई है,
इसे ठीक करना जरूरी है।
प्रकृति प्रदूषित हो गई है,
औद्योगीकरण की देन से।
चहुँ ओर समस्या छायी है,
न कोई सुख से है न चैन से ।
वृक्षों से अपराध कर मनु ,
सुखी कैसे रह पाएगा ।
धरा के समृद्धि बिना ,
मानव शांति से कैसे जी पाएगा।
धरा का वैभव पादप वृक्ष,
इनसे न करो अपराध।
हरियाली, जल के बिना,
जीना हो जाएगा दुश्वार।
हरियाली से धरा सजाओ,
संस्कार से सजाओ समाज।
आ रही है पावस ऋतु ,
नर्सरी लगाओ हर घर द्वार।
वृक्ष के बिना धरा अधूरा,
व्यवहार के बिना जीवन।
जल के बिना जीना नहीं ,
जीव जंतु बिना सूना लगे वन।
स्वरचित रचना
उर्मिला सिदार उर्मी
No comments:
Post a Comment