Thursday, June 6, 2024

बेमेतरा से दिलीप टिकरिहा "छत्तीसगढ़िया" की रचना- पर्यावरण प्रेम के गीत

कवि - दिलीप टिकरिहा "छत्तीसगढ़िया"
जिला - बेमेतरा
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - पर्यावरण
शीर्षक - पर्यावरण प्रेम के गीत 
विधा - गीत
संपर्क - पिरदा (भिंभौरी),
बेरला-बेमेतरा
            9753304788


🙏🌳 *पर्यावरण प्रेम के गीत* 🌳🙏

कइसे करंँव मैं जतन धरती के, 
             कइसे करंँव मैं जतन |
जंगल कटावत हे, भुइँया सुखावत हे, 
            आगी उगलत हे पवन ||
कइसे करंँव मैं जतन धरती के... 

1. मनखे के करनी देख रानी -
              प्रकृति हर सुसकत हे |
    बिन पानी के पावन भुइँया, 
         देख तो कइसे भभकत हे ||
    जगा-जगा मा बिरवा लगाके, 
                   बचालव पर्यावरण |
 कइसे करंँव मैं जतन धरती के....

2. कारखाना के कुहरा ले संगी, 
            धरती दाई करियावत हे |
   मीठ पानी मा जहर घोरइया, 
              बइरी मन इतरावत हे ||
   प्रदूषण मिटालव,ऑक्सीजन बचालव, 
               ममहाही सुग्घर चमन |
कइसे करंँव मैं जतन धरती के.... 

3. झिल्ली खाके गऊ माता मन, 
          देख तो कइसे तड़फत हे |
    रूखराई ले छाँव - पानी बर, 
           जीवजंतु सब तरसत हे ||
    बंजर भुइँया ल मिलके हरियालव, 
         जिनगी हो जाही धन-धन |
कइसे करंँव मैं जतन धरती के.... 
जंगल कटावत हे, भुइँया सुखावत हे, 
             आगी उगलत हे पवन |
कइसे करंँव मैं जतन धरती के....


*दिलीप टिकरिहा "छत्तीसगढ़िया"*
*पिरदा (भिंभौरी),बेरला-बेमेतरा*
        *9753304788*
🌹🌹🌷🌷🌻🌻🏵️🏵️🌳🌳🙏

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