जिला -रायपुर
राज्य -छत्तीसगढ़
शीर्षक - संघर्ष
विधा -कविता
मोबाइल नंबर -9926179870
मैं मानव, घबराता हूँ,
जीवन के संघर्षों से।
कभी थक जाता, कभी डर जाता,
तो कभी मैं हार जाता,
जीवन के संघर्षों से।
टूट हार जब घर आता,
बिस्तर पर हूँ पड़ जाता।
बस सोचता रहता मैं मन में,
कब पाउँगा, इन संघर्षों से छुटकारा।
पर जब, अपनों को देखता हूँ।
उस क्षण मैं , सब भूल जाता हूँ।
अपनों की प्यारी मुस्कान से ,
मैं भीतर से आनंद पाता हूँ।
उनका जो विश्वास है मुझपर,
जो उम्मीदें अपनों ने, मुझसे लगाई है।
वही देती है हिम्मत मुझको,
उत्साह से फिर भर देती है।
इक नई सुबह के संग फिर मैं,
उम्मीदों के पंख लगा।
स्वयं के सपनों को पूरा करने,
इक नई राह निकल जाता।
मैं मानव, कर्म को मान धर्म अपना,
नित कार्य करता जाता हूँ।
कभी फल मिलता है मुझे जल्दी,
कभी असफल भी हो जाता हूँ।
संघर्ष तो हिस्सा है जीवन का,
इससे जीवन का मोल है।
इसके संग जो हर्ष है जीवन का,
ही तो अनमोल है।
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित
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