Wednesday, June 5, 2024

बलौदा बाजार से आर. के.कुंजाम की रचना- माँ

नाम -आर के कुंजाम व्याख्याता
निवास -भाटापारा जिला बलौदाबाजार भाटापारा
राज्य -छत्तीसगढ
विषय -मां
विधा-कविता
संपर्क -पंडित दिन दयाल उपाध्याय वार्ड मेहता नगर भाटापारा
फोन -9907670711
              *मां*
ममता की मूरत मां होती है,दो परिवार की तारण हार बेटी से मां ही होती है।
   अपने आंचल के छांव,नौ माह ढकने वाली होती है मां।
    सबको खिला पिला कर स्वयं भूख सहन करने वाली होती है मां।
   अपनी दर्द छिपाकर, अपने बच्चों की मरहम करने वाली होती है मां।
    लक्ष्मी की मूरत ज्ञान की सूरत दुश्मनो के अवतार स्वरूप शक्ति होती है मां।
   दया करूणा का भंडार,घर में सबका पालन करने वाली होती है मां।
   सृष्टि का विस्तार करने वाली होती है मां।
   दुलारती पुचकारती प्रथम गुरु के रूप अक्षरों का बोल ज्ञान सिखाती है मां।

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