जिला- सरगुजा
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- माँ
शीर्षक- माँ
विधा-अतुकांत
मो.नं.-9131850712
*माँ*
माँ एक अक्षर
लेकिन एक अक्षर ही
सम्पूर्ण शब्द
माँ मौन को
परिभाषित करती है
अपने भावों से
अपने ममत्व से
अपने स्पर्श से
बंद आँखों से
देखती है
सौंदर्य को
बचपन की किलकारियों में
यौवन के रस व उमंग में
बुढ़ापे की अनुभवी झुर्रियों में...
भूल जाती है सारे कष्ट,
शिशु को जब गोद में लेती
गिले में सोकर ,सूखे में सुलाती,
बच्चे को सीने में समा लेती जब
सारे जहाँ की खुशियाँ मिल जाती !
वो सच में माँ ही होती है।
बच्चों की जब आती है बारी
क्यों माँ-बाप हो जाते भारी
क्यों मति उनकी जाती मारी
क्या यही है जीवन की दुश्वारी।
शशि मित्तल "अमर "
बतौली, सरगुजा (छत्तीसगढ़)
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