जिला- महासमुन्द
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय- पर्यावरण
विधा- गीत
संपर्क -9179134271
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बदला रूप पर्यावरण का,
सूरज भी अब गुस्साया है।
जंगल काटा नदियाँ सूखी,
रातों में अगन बरपाया है।
वो हवा नहीं पहले जैसी,
बरसा न बरस सकी वैसी।
बदली बदली है पुरवाई,
कहती तुमने भटकाया है, जंगल काटा…...
होकर निर्मम धरती छेदा,
आसमान का सीना भेदा।
मर्म जानने प्रकृति प्रवृति,
ज्ञानी महान कहलाया है, जंगल काटा…......
किया प्रयोग अणु परमाणु का,
खौफ़ रहा नहीं शशि भानु का।
नित नूतन है किया परीक्षण,
मिसाईल खूब बनाया है, जंगल काटा…...
मची होड़ है दुनिया भर में,
आगे रहने को भूचर में।।
बिगड़ा खेल पर्यावरण का
भूमंडल अब अकुलाया है, जंगल काटा…....
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