Sunday, June 9, 2024

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना-पिता का प्यार

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- पिता
शीर्षक- पिता का प्यार 
विधा- छंद मुक्त कविता 
संपर्क- 7974389033

पापा गुरुवर आप हो;  मिलता तुमसे प्यार।
मेरे तुम भगवान हो; करते सदा दुलार।।1।।

सारे ही संसार में; लाखों में हो एक।
देकर तरुवर छाँव सा; देते प्यार अनेक‌‌।।2।।

पिता कंधों में बिठाकर; घूमा रहे रोज।
नित रचना को लिखकर; बनना है कवि ओज।।3।।

सही गलत के राह को; पिता बताये जान।
मन के प्रेमिल भाव से; सारे बाते मान।।4।।

काम करके घर को आये; लगे पुत्र के बाँह।
सुंदर से आँगन में; फैला प्रीत छाँह।।5।।
       
पुत्र पिता के छाँव में; बड़ा हुआ है आज।
उच्च शिक्षा के शान से; पिता करता नाज।।6।।

पिता की बाते़ पुत्र मानें; सुखमय जीवन पाय।
पिता अपने पूत को; आर्शीवाद दे जाय।।7।।

         ✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
         ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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