Sunday, June 9, 2024

कांकेर से कुसुम जैन की रचना- श्रद्धा

श्रीमती कुसुम जैन 
जिला - कांकेर 
राज्य - छत्तीसगढ़ 
विषय - श्रद्धा 
शीर्षक- श्रद्धा

श्रद्धा करो माता-पिता का ,
श्रेष्ठ गुरु उन्हें मानकर ।
उनसे बड़ा न कोई  जग में 
पूजो उन्हें ईश्वर जान कर।
श्रद्धा भाव से हरि भजन से ,
कट जाता जग का हर पाप ।
हरी हरते हैं  हर दुख को,
 दूर करते  सब  संताप ।
श्रद्धा से जो सर नवाये ,
अपने गुरु चरणों में ।
हर संकट से तार लेते हैं,
 ले लेते गुरु अपने शरणों में ।
श्रद्धा भाव हो मन में ,
हृदय में हो भक्ति भाव ।
हरि देते साथ सदा ही,
 पार लगाते  जीवन के नाव ।

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