जिला- रायगढ़
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय- संवेदना
विधा- कविता
संपर्क नंबर- 9302297 994
*संवेदना*
संवेदना में फंसा है भ्रमित मानव,
कब संवेदना से नियंत्रित हो पायेगा।
अपने को संज्ञानियता में जीने का,
कब भ्रमित इंसान मन बना पायेगा।
भ्रम मान्यताएँ और संवेदनाओं से,
कब मानव होगा निवृत्ति निजात।
संवेदनाएँ नियंत्रित न होने से मनु,
विवशता वश कुंठित जीता है इंसान।
भय, आस्था, प्रलोभन, मान्यताएं,
फैला है घोर सारा भू जग जहान
कहीं समाधान की निरंतरता नही,
न कहीं संबंधों में न्याय पूर्वक तृप्ति।
संवेदना बाजार फैला है वर्तमान ,
भोग मानसिकता वस्तु दुरुपयोग।
जड़ भौतिक वस्तु में तृप्ति नहीं है,
चाहे तू जितना भोगना चाहो भोग।
स्वरचित रचना
उर्मिला सिदार "उर्मी"
बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
No comments:
Post a Comment