ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय- कविता
शीर्षक- श्रद्धा
विधा--छंदमुक्त
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक - ८ जून
*श्रद्धा*
श्रद्धा से किये काज का नित्य
फल वांछित परिणाम मिलता है।
कर्म की प्रधानता इंसान को नित्य
कर्मानुसार उसे महान बनाता है।।
श्रद्धा की परिभाषा जाने जो व्यक्ति
श्रद्धा की भावना को कहां त्यागता है।
महान होते हैं दुनिया में ऐसे व्यक्ति
जो परेशानियों में भी धैर्य नहीं खोता हैं।।
हर किसी के दिल श्रद्धा का भाव नहीं
जिसमें श्रद्धाभाव जागृत हो वह महानुभाव है।
इस दुनिया में क्या लेकर आये क्या ले के जाये
कर्म की पूजा जिसने किया मरणोपरांत भी फल पाया है।।
कर ले ऐसा श्रद्धा का भाव हर मन
रह जायेगा तेरा यही श्रद्धा हर मन में।
श्रद्धाभाव आदि अनन्त से हरमन सुनते आया
वर्तमान भी हरमन श्रद्धा भाव पाठ ही पढ़ाना है।।
जीवन रेखा खिंचना अपना श्रद्धा का
बन जाये लक्ष्मण रेखा न मिटा सके कोई।
श्रद्धा अर्पण करें अपने-अपने जीवन का
हनुमान संजीवनी बने न टाल सके इसे कोई।।
श्रद्धा,आस्था,उपासना,व्रत नित्य करना
दुआ,दवा जैसे प्रसाद बन कर कार्य करता है।
हरमन श्रद्धा भाव से उपवास करना
विपत्ति भी छु मंतर हो जाया करता है।।
रचनाकार कलमकार
हरमन कुमार बघेल
*(हरमन)*
आरंग जिला-रायपुर
छत्तीसगढ़
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