Saturday, June 8, 2024

रायपुर से बसन्त कुमार साहू "ऋतुराज" की रचना- श्रद्धा

कवि:- बसन्त कुमार साहू "ऋतुराज" 
राज्य  :- छत्तीसगढ
जिला :- रायपुर (अभनपुर)
विधा :-  काव्य
शीर्षक :- श्रद्धा 
सम्पर्क नंबर  :- ९३४०९५६००१

मैं श्रद्धा हूं मेरे बिना , जग सूना हो जाते हैं ।
मेरे बिना तो हर व्यक्ति , नमूना बन जाते हैं।।

 मुझ पर ही परिवार टिका है, व्यवहार मुझ ही बनते हैं ।
पशु पक्षी खूंखार भुजंग भी , मेरे वश में रहते हैं ।।

लेकर चला ना साथ जो मुझको, तिरस्कार वह सहते हैं ।
जिसने त्यागा मुझको उनसे ,अपने भी दूर रहते हैं ।।

 मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा में ,भोग प्रभु को लगाते हैं ।
मेरे बिना तो भोग लगाना , अधूरे रह जाते हैं ।।

किंतु श्रद्धा हृदय जो अपने, पत्थर में प्राण आते हैं ।
जिनके अंदर भाव है मेरा , विश्व विजेता बनते हैं ।।

       बसंत कुमार साहू "ऋतुराज"
                    अभनपुर

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