राज्य :- छत्तीसगढ
जिला :- रायपुर (अभनपुर)
विधा :- काव्य
शीर्षक :- श्रद्धा
सम्पर्क नंबर :- ९३४०९५६००१
मैं श्रद्धा हूं मेरे बिना , जग सूना हो जाते हैं ।
मेरे बिना तो हर व्यक्ति , नमूना बन जाते हैं।।
मुझ पर ही परिवार टिका है, व्यवहार मुझ ही बनते हैं ।
पशु पक्षी खूंखार भुजंग भी , मेरे वश में रहते हैं ।।
लेकर चला ना साथ जो मुझको, तिरस्कार वह सहते हैं ।
जिसने त्यागा मुझको उनसे ,अपने भी दूर रहते हैं ।।
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा में ,भोग प्रभु को लगाते हैं ।
मेरे बिना तो भोग लगाना , अधूरे रह जाते हैं ।।
किंतु श्रद्धा हृदय जो अपने, पत्थर में प्राण आते हैं ।
जिनके अंदर भाव है मेरा , विश्व विजेता बनते हैं ।।
बसंत कुमार साहू "ऋतुराज"
अभनपुर
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