राज्य :- छत्तीसगढ
जिला :- कोरबा
विधा :- काव्य
शीर्षक :- नैतिकता
सम्पर्क नंबर :- 7987994537
आज समाज से धीरे धीरे ,
नैतिकता हो रही है लुप्त । देखते सारे लोग सभी कुछ,
क्यूँ फिर भी पड़े हुए हैं सुप्त ।।
अस्तित्व में इसको है रखना ,
जीवन मूल्य और चरित्र संग ।
व्यवस्थित जीना है सिखलाता ,
आचरण का एक जरूरी अंग ।।
इन्हीं गुणों के कारण मानव ,
बनके दिखलाता महामानव ।
इसके बिना ना समझे रिश्ते ,
लूटे इज्जत धन बने दानव ।।
इसका उद्भव स्वयं के अंदर ,
भी स्वयं से होता है जानों ।
मांँ बहन बेटियांँ भी सुरक्षित ,
संभव इसी से ही है मानों ।।
नैतिकता है तभी आज तक ,
टिका हुआ यह सारा संसार ।
नहीं तो कहांँ नाते परिवार ,
बन जाती ये दुनिया बाजार ।।
गार्गी चटर्जी "आशा "
कोरबा (छत्तीसगढ़)
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