Wednesday, June 5, 2024

कोरबा से गार्गी चटर्जी "आशा " की रचना- नैतिकता

नाम :- गार्गी चटर्जी "आशा "
राज्य  :- छत्तीसगढ
जिला :- कोरबा
विधा :-  काव्य
शीर्षक :- नैतिकता
सम्पर्क नंबर  :- 7987994537 

आज समाज से धीरे धीरे ,
नैतिकता हो रही है लुप्त । देखते सारे लोग सभी कुछ,
क्यूँ फिर भी पड़े हुए हैं सुप्त ।।

अस्तित्व में इसको है रखना ,
जीवन मूल्य और चरित्र संग ।
व्यवस्थित जीना है सिखलाता ,
आचरण का एक जरूरी अंग ।।

इन्हीं गुणों के कारण मानव ,
बनके दिखलाता महामानव ।
इसके बिना ना समझे रिश्ते ,
लूटे इज्जत धन बने दानव ।।

इसका उद्भव स्वयं के अंदर ,
भी स्वयं से होता है जानों ।
मांँ बहन बेटियांँ भी सुरक्षित ,
संभव इसी से ही है मानों ।।

नैतिकता है तभी आज तक ,
टिका हुआ यह सारा संसार ।
नहीं तो कहांँ नाते परिवार ,
बन जाती ये दुनिया बाजार ।।

गार्गी चटर्जी "आशा " 
कोरबा (छत्तीसगढ़)

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