Friday, May 31, 2024

रायगढ़ से उर्मिला सिदार "उर्मी" की रचना - पर्यावरण प्रभाव

कवयित्री- उर्मिला सिदार "उर्मी"
जिला-रायगढ़
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय- पर्यावरण 
शीर्षक-"पर्यावरण प्रभाव"
विधा- कविता 
मो. नंबर- 930 3298 994
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*पर्यावरण प्रभाव*
आओ हम मिलकर पर्यावरण सजाएँ,
अपने मानव होने का फर्ज निभाएंँ।
पर्यावरण के बिना जीना नहीं बनेगा,
प्रकृति के बिना हमारा अस्तित्व न
होगा।
आओ हम मिलकर ........

समृद्ध पर्यावरण दुरुपयोग कर मनु,
मनमाना कर समस्याओं से जूझ रहे
हैं।
ताप ग्रस्त हो, रही वसुंधरा हमारी,
ऋतुओं में संतुलन बिगड़ रही है।
आओ हम मिलकर........

प्रदूषित पर्यावरण ह्रासित हो कर,
धीरे-धीरे विनाश की ओर जा रही है।
भ्रमित मानव की मति मारी गई है,
अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मार रही है।
आओ हम मिलकर...........

मिट्टी, वायु ,जल,ताप अनियंत्रित हो,
कर रहे हैं,अव्यवस्थित क्रियाकलाप।
आज चहुँ ओर समस्या दिख रही है,
न कोई मनु सुख से है न चैन से है।
आओ हम मिलकर............

पेड़पौधे, जीवों पर न करो अत्याचार,
प्रकृति ही हमारा जीने का है आधार।
आओ संकल्प लें हम प्रकृति बचाएं,
हम समृद्धि धरा में हरियाली सजाएँ।
आओ हम मिलकर.............

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स्वरचित रचना 
उर्मिला सिदार "उर्मी"


आओ हम मिलकर...............

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