कवियित्री-सुश्री गीता उपाध्याय'मंजरी'
जिला-रायगढ़
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-माँ
शीर्षक- *माँ*
विधा- मुक्त छंद काव्य
सम्पर्क -9098075944
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नमन काव्य संसद💐🙏🏼
मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं विश्व की सभी माताओं को मेरा नमन🌹🙏🌹
विषय:- *माँ*
विधा:- गीत (मुक्क्त छंद)
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*अम्बर सा माँ का आँचल ,ममता माँ का वरदान है।*
*स्वर्ग है माँ के चरणों में , धरती पर माँ भगवान है।।*
माँ रखकर नौं मास उदर में,सर्जन पोषण करती है।
जब आते संसार में हम ,माता ही पालन करती है।
माँ ही प्रथम गुरू बनकर ,देती संसार का ज्ञान है।
*स्वर्ग है माँ के चरणों में, धरती पर माँ भगवान है।।*
सारे कष्टों को सहकर माँ ,सुत को सुख ही देती है।
सुखी रहे संतान प्रार्थना, कर आँसू पी लेती है।।
बरसे जो दुख की बदली तो, माता छत्र समान है।
*स्वर्ग है माँ के चरणों में, धरती पर माँ भगवान है।।*
पूत कपूत सुनें देखे हैं , माता नहीं कुमाता है।
माँ की ममता पाकर पीड़ित, उर शीतल हो जाता है।।
माँ के आशीर्वाद से, मिल जाता ईश्वर अवदान है।
*स्वर्ग है माँ के चरणों में , धरती पर माँ भगवान है।।*
--सुश्री गीता उपाध्याय"मंजरी"
रायगढ़ छत्तीसगढ़
दिनांक: 12-5-2024
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