कवि :- दीपेश पाण्डेय अंबर।
जिला - प्रयागराज
प्रदेश - उत्तर प्रदेश
शीर्षक - बचपन
विधा - कविता
सम्पर्क - 735543633
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*गर चाह रहा उड़ना तेरा मन बनकर एक परिंदा है।।*
*तो मान ले अंबर तुझमे अब भी बचपन तेरा जिंदा है।*
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*गर उड़ती हुई पतंगो को लख मन तेरा ललचाता है।*
*उस गुल्ली डंडा के पिच पर गर पग तेरा रुक जाता है।*
*गर फर्क नहीं पड़ता तुझपर यश गान मिले या निंदा है।*
*तो मान ले अंबर तुझमे अब भी बचपन तेरा जिंदा है।*
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*खट्टी इमली मीठा चूरन, तन आइस क्रीम के ठेले में।*
*ऊँचा झूला मन हो फूला कब पहुंचूंगा उस मेले में ?*
*गर आइस पाइस छिपा छिपायी अबभी खेल चुनिंदा हैं।*
*तो मान ले अंबर तुझमे अब भी बचपन तेरा जिंदा है।*
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*ताने बाने ये ऊंच नीच ये भेद भाव की तलवारें।*
*काला गोरा क्या होता है क्या हैं मजहब की दीवारें?*
*गर प्रेम ही प्रेम तेरे दिल में बाकी सब बँधा पुलिंदा है।*
*तो मान ले अंबर तुझमे अब भी बचपन तेरा जिंदा है।*
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सर्वाधिकार सुरक्षित
दीपेश पाण्डेय अंबर
प्रयागराज 🚩🚩
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