तहसील- धमधा, जिला- दुर्ग (छ. ग.)
विषय- समसामयिक
विधा- काव्य
शीर्षक- मिटती मानवता
संपर्क- 9098134583
बढ़ रहा आक्रांत चंहुदिश,
कुछ भी तो महफूज नही l
उन्मुक्त हुआ है आदमी ,
इंसानियत रहा उसे सूझ नही ll
बर्बरता की हद्द हो गई ,
इन्सान बना हैवान
लोक लाज की परवाह नही ,
सस्ती हो गई जान ll
अफवाहों और साजिशों का
पर्दाफाश जरुरी है
"हाथरस " का मकसद जाने बिन
सच्चाई अधूरी है ll
दरिंदो को सजा मिले ,पर !
निर्दोष भी है डरा हुआ l
गन्दी खेल है राजनीति ,
दुशासन से भरा हुआ ll
जो दिखाये मान ले (मीडिया)
जनता अब भोली नहीं l
ग़र ये जिद्द में आ जाये तो ..
चल न जाये गोली कहीं !!
- मौलिक रचना (सर्वाधिकार सुरक्षित)
यथार्थ- हाथरस की घटना के प्रति संवेदना(दिसम्बर 2023)
निवास- दानीकोकड़ी, 145, साहू पारा. पोस्ट- करेली, तह. धमधा
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