जिला-कोरबा
राज्य -छत्तीसगढ़
विषय- विभिन्नताओ का देश भारत
शीर्षक -जैव विविधता विद्या- कविता
संपर्क- 93 99 43 25 77
*जैव विविधता*
जल थल वायु मंडल से, मिलकर बनता जैवमंडल है।
विभिन्नताएँ सब में है, फिर भी कहलाता मंडल है ।।
भिन्न-भिन्न है जीव जंतु, भिन्न-भिन्न है वनस्पतियाँ।
पर्वत पठार और मैदान, भिन्न-भिन्न है भू- आकृतियाँ ।।
भिन्न-भिन्न है लोग यहाँ, भिन्न-भिन्न है आदिवासियाँ।
भिन्न-भिन्न है रहन-सहन, फिर भी एक है भारत वासियाँ।।
जैव विविधता के कारण ही ,जुड़े हुए हम एक चक्र से ।
अगर यदि संतुलन बिगड़ा, मर जाएँगे प्रकृति कहर से ।।
जैव विविधता बनी रहें, बचे रहेंगे प्रकृति कहर से।
मिलकर चलो पेड़ लगाए, सजाए हरी-भरी वादियों से ।।
जैव विविधता से भरा हुआ ,ये हमारा भारत महान है।
इसके जर्रे-जर्रे में कहानी, वीर शहीदों की बलिदान है ।।
इसकी माटी जलवायु में, बसते हम सबके प्राण हैं।
इसकी रक्षा के खातिर, निछावर करते अपने प्राण है।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
No comments:
Post a Comment