जिला :- कोरबा
राज्य :- छत्तीसगढ़
विषय :- बुद्ध पूर्णिमा
शीर्षक :- निर्वाण
विधा :- कविता
मोब नंबर :- 7987994537
हुआ था जनम नेपाल , पवित्र लुंबिनी जहांँ ।
करे दर्शन भरे भाव , भगत सारे वहांँ ।।
बना था महल तो तीन , विलास भोग के लिए ।
मनोरंजन सभी त्याग , कुंँवर राजा किए ।।
मिला था अतुल आराम , तजे सभी अगाधता ।
यही चाह कि मिटा , गहन अज्ञानता ।।
पड़े थे निकल वो संत , घिरी बड़ी निशा घनी ।
रही खोज बस एकांत , मन तपस्या तनी ।।
लिए थे कठिन सन्यास , बड़ी हठी उपासना ।
किए प्राप्त तब निर्वाण , परम आराधना ।।
जरा ब्याधि तन की मृत्यु , मिली अतृप्त ज्ञान वो ।
महाबोध तरु के छांँव , जब किए ध्यान तो ।।
नहीं देख सकते बुद्ध , किसी मनुष्य को दुखी ।
सदा एक बस थी चाह , जन सभी हों सुखी ।।
दिखाए सकल को राह , प्रचार खूब थे किए ।
अहिंसा परम है धर्म , जगत सीखा गए ।।
गार्गी चटर्जी "आशा "
कोरबा (छत्तीसगढ़)
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