स्थान : रायपुर, छत्तीसगढ़
शीर्षक : मां
विधा: काव्य
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मां.....
बीमारी में दवा बन जाती है,
टूटे दिल की दुआ बन जाती है...
मेरे हर फटे सपने सिलती है,
मेरे लिए ख्वाब नए बुनती है ...
मेरी आंखों से अपने सपने जीती है,
खुद तो खाली कर, मुझमें मैं भरती है...
मीलों दूर से पढ़ लेती है मेरे मन की बात,
हमेशा कैसे कहती लेती है, अच्छे हैं हालात...
खुद मां बन के जान पाई हूं ये बात,
हर मां के एक जैसे ही होते हैं जज़्बात ।।
रश्मि...
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