Friday, May 24, 2024

बेमेतरा से दिलीप टिकरिहा "छत्तीसगढ़िया" की रचना - गुरु हे ईश समान

कवि - दिलीप टिकरिहा "छत्तीसगढ़िया"
जिला - बेमेतरा
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - गुरु वंदना
शीर्षक - गुरु हे ईश समान
विधा - छप्पय छन्द
संपर्क - पिरदा (भिंभौरी), बेरला-बेमेतरा

*दुनों हाथ ला जोर, नमन गुरु के तैं करले |*
*मिल जाही सत ज्ञान, उँखर तैं रद्दा धर ले ||*
*गुरु हे ईश समान, नाम ला जपले सुग्घर |*
*बनही बिगड़े काम, तोर होही मन उज्जर ||*
*गुरु के कर ले वंदना, मिट जाही संताप जी |*
*जिनगी अपन सँवार ले, कर ले सुग्घर जाप जी ||*
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