Tuesday, May 28, 2024

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय'की रचना- जल ही जीवन है

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- जल
शीर्षक- जल ही जीवन है 
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033

जल जीवन आधार है, पानी से है प्राण।
जीवन पानी से बचें,जल रक्षण कल्याण।।1।।

पानी-पानी चीखकर, लोग मचाए शोर।
धरा सूखती धूप से, जल संकट सब ओर।।2।।

सूरज तपता धूप से; निकल रही है आग।
‌जो भी आते ताप में; बन जाते हैं काग।।3।।

पानी से  बेहाल  है; मानव  जीवन  आज।
पौधों को काटो नहीं; करो समझकर काज।।4।।

पंछी  तड़पे  नीर बिन; हैं कितने बेहाल।
तड़प रहे हैं प्यास में; संकट है विकराल।।5।।

वृक्षों को काटो नहीं; देते हैं यह छाँव।
वन उपवन को काट कर; खुद न जलाओ पाँव।।6।।

प्रिय निषाद विनती करे, बनो मानव खुद्दार।
जल जीवन आधार से, है जीवन का सार।।7।।

         ✍🏻 परमानंद निषाद'प्रिय'
         ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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