राज्य छत्तीसगढ
जिला दुर्ग
विधा काव्य
शीर्षक जल
सम्पर्क नंबर 7974631528
*जल*
अग्नि की प्यास बुझाती जल
बंजर को हरा बनाती जल
काया को स्वच्छ करती है जल
निरोग हमे रखती हैं जल l
कभी सिन्धु में समाहित जल
तो कभी कमंडल में रहती जल
जीवन दायिनी होती है जल
जल बिन नहीं हमारा कल l
सृष्टि की रचना में जल
वृष्टि की हर बूंद में जल
शिव जी की जटा में समाई गंगा जल
पापों से मुक्त कराती जल l
कभी नयनों से छलकती जल
ओस की हर एक बूंदों में जल
बिन जल जीवन नही इक पल
हम सबके लिए है जरूरी जल l
प्रिया गुप्ता
भिलाई
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