Friday, May 31, 2024

बलौदा बाजार से आर के कुंजाम व्याख्याता की रचना - धरती ह जलत हे

कवि- आर के कुंजाम  व्याख्याता 
जिला- बलौदाबाजार भाटापारा 
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय- ताप अऊ संताप
शीर्षक- धरती ह जलत हे
विधा- कविता 
संपर्क- पं दिनदयाल उपाध्याय वार्ड मेहता नगर भाटापारा 9907670711
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        धरती ह जलत हे
धरती ह जलत हे, सूरूज के ताप म।
  पेड़ पौधा काटे के संताप होवत हे मानव के मन म।
   निर्दोष चिरऊ चिरगुन,पशु जीव अऊ जन्तु,
   काय करही मानव के अईसन करतूत म।
  परकिरती ह सब दीस मानव ल सोचे समझे के बुद्धि,
  फेर काबर समझ नई आवत ए आक्सीजन अऊ कोरोना के आड़ म।
   जंगल ल कटवावत हे, विकास के आड़ लेके,
  ये देश के नेता मंत्री वैज्ञानिक अऊ जनता काबर नई समझत ए ए ताप के आड़ म।
   बड़े बड़े कंपनी,मोटर कार निकालत हे धुंआ,
   जहरील गैस सांस म जात हे आक्सीजन के आड़ म।
   गांव के गरीब, जंगल के बनईय्या,बच्चईय्या,
  दुखी मन से सहत हे मरत हे,गरमी के ये ताप अऊ संताप म।
   येकर सेती अरजी हे,रूख राई,जीव जन्तु पशु पक्षी ल,
  बचा ल बुद्धिमान मनखे,रूख राई लगाके ताप अऊ संताप के आड़ म।

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