जिला- दुर्ग
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय-मज़दूर
शीर्षक- *"एक मज़दूर'*
विधा- कविता
संपर्क- 6264617491
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मई की भीषण गर्मी,
और तपता हुआ दोपहर,
एक मज़दूर,
बोझ से लदा ठेला,
धकेले जा रहा, पथ पर।
गर्म तवा जैसी जमीं पर,
चल रहा है, नंगे पांव,
और पूरा का पूरा बदन,
पसीने से है, तरबतर।
परिवार के पेट की आग को,
बुझाने, भिड़ा है इस क़दर,
कि गर्म लू की लपटें भी,
उसके सामने है, बेअसर।
एक मज़दूर.....
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मेरी मौलिक रचना है
रचना:-जीवन चन्द्राकर"लाल''
बोरसी 52 दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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