Saturday, May 4, 2024

प्रयागराज से दीपेश पाण्डेय अंबर की रचना- क्या आज भी अबला नारी है?

कवि :- दीपेश पाण्डेय अंबर।
जिला - प्रयागराज
प्रदेश - उत्तर प्रदेश
शीर्षक - क्या आज भी अबला नारी है?
विधा - ताटंक छंद 
सम्पर्क - 7355436337
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*जो सत्यम शिवम सुंदरम है इस धरती की फुलवारी है।*
*जो जननी है उस ईश्वर की, माँ की भी जो महतारी है।*
*जो सत्यमेव जयते का सबक सिखाती है इस धरती को,*
*अब मुझे बताओ जग वालों क्या आज भी अबला नारी है?*
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*जो रक्त बीज को मार रही, महिषासुर को संघार रही।*
*चंड़िका चपल माँ विकराली, हाथों में थमी कटार रही।*
*जिसके आगे नत मस्तक देवों ने आरती उतारी है।*
*अब मुझे बताओ जग वालों क्या आज भी अबला नारी है?*
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*अरि दल का रक्त बहा जैसे सरिता में बहता पानी है।*
*उस मर्दानी झांसी के रानी की एक परम कहानी है।*
*जिसके निज लहू से दमक रही इस भारत की फुलवारी है।*
*अब मुझे बताओ जग वालों क्या आज भी अबला नारी है?*
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*ये हल्दी रोली चंदन है।*
*ये ममता का अभिनंदन है।*
*ये पूजा धूप दीप मनहर, ये भक्ती का अभिनन्दन है।*
*ये ममता का वरदान धरा पर ईश्वर की बलिहारी है।*
*अब मुझे बताओ जग वालों क्या आज भी अबला नारी है?*
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*कंधे से कंधा मिला रही जो साथ रही है पल पल पर।*
*उर तल भूतल नभ तल उत्तल इस पहुंमी के वक्षस्थल पर।*
*जो देश की एक परिभाषा है अंबर की कविता न्यारी है।*
*अब मुझे बताओ जग वालों क्या आज भी अबला नारी है?*
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सर्वाधिकार सुरक्षित
दीपेश पाण्डेय अंबर
प्रयागराज 🚩🚩

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