जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय- ये प्रेम के बंधन
शीर्षक -ये बंधन
विद्या- गीत
मोबाइल नंबर -9399 432577
झूम के बरसा ये बादल है, भीग गया तेरा-मेरा तन है।
तुझमें बसा ओ मेरा मन है , मुझमें बसा ये तेरा मन है।।2।।
टूट न जाए तुझको कसम है , सात जन्म का ये बंधन है।
दुख-सुख हमने मिलके बाँटा , बड़े प्रेम से लगाया चमन है ।।2।।
मिलन -जुदाई हमने काँटा , मैं धरती तू नील गगन है।
अंजान नगर के ये दो राही, मिलके सहे दुनिया के तपन है।। 2।।
एक- दूजे के लिए बने हम , हाथ में लेकर हाथ चले हम ।
थोड़े गम है थोड़ी खुशियाँ, हो ना जाए आँखे नम है ।।2।।
दीया और बाती बनके जले हम , फिर ना रहेगा कोई भी गम।
जनम-जनम का ये बंधन है , लगता हमको ये भी कम है ।।2।।
फूल और कलियाँ महेक रहे हैं, भंवरे देखो बहक रहे हैं ।
मन भी इनका है चंचल, खग भी देखो चहक रहे है।। 2।।
नदियाँ करती है कल- कल , सरगम सागर छेड़ रहे हैं।
हम दोनों को इस बंधन की ,देखो बधाई दे रहे हैं ।।2।।झूम के बरसा....।।
No comments:
Post a Comment