"राज"
जिला-दुर्ग
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-उम्मीदों का सफर
शीर्षक-उम्मीदों की राह
विधा-कविता
संपर्क-7898837330
उम्मीदों की राह
निकल पड़ा हूँ मैं उम्मीदों की राह में,
मिल जायेगी मंज़िल कहीं इसी चाह में।
मन में हजारों ख्वाहिशें लिए रहता हूँ,
पूरा होगा सपना इसी आस में बैठा हूँ।
प्रयत्नशील हूँ मैं उमंग और उत्साह में,
मिल जायेगी मंज़िल कहीं इसी चाह में।।
कई मुश्किलें आयेंगी नहीं छोड़ूंगा आस,
आगे बड़ता ही रहूँगा मन में है विश्वास।
डूबकर निकल जाऊँगा गहरे अथाह में,
मिल जायेगी मंज़िल कहीं इसी चाह में।।
मेहनत करनी पड़ेगी चाहे कड़ी धूप में,
मेहनत का फल मिलेगा किसी रूप में।
आऊंगा नहीं किसी झूठी अफवाह में,
मिल जायेगी मंज़िल कहीं इसी चाह में।।
*राजकुमार निषाद'राज'*
पत्राचार-वार्ड 19, बजरंग नगर उरकुरा, रायपुर छत्तीसगढ़ -493221
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