Saturday, April 6, 2024

बलौदा बाजार से कवि काजल मानिकपुरी की रचना- सिख रही हूँ

नाम - काजल मानिकपुरी
जिला - बलौदा बाजार 
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - सिख रहीं हूं
सम्पर्क - 6264725694

पापा के पैसे बचाने के लिए,
      भुख सहना सिख रहीं हूं।
 और अपनों के खुशियों के लिए,
       अब अकेले रहना सिख रहीं हूं।।

  सब कुछ होने के बावजूद,
      मांग जैसे भीख रहीं हूं।
  मन तो उदास है,
      पर चेहरे से मैं खुश दिख रहीं हूं।।

 बेवजह लोग मुझे ग़लत समझते हैं,
    इसलिए अब जबरजस्ती  फंसना सिख रहीं हूं।
 और किसी को मेरी उदासी का पता मत चले,
    इसलिए अब जबरजस्ती हंसना सिख रहीं हूं।।

कौन जाने कि कौन कैसा है,
   इसलिए अपनों का मन पढ़ना सिख रहीं हूं।
कभी भी अकेला पन मुझे महसूस न हो,
   इसलिए खुद से लड़ना सिख रहीं हूं।

जो मुझसे प्यार करते है विश्वास करते है,
   उनके लिए कुछ करना सिख रहीं हूं।
और जो मुझसे प्यार तो करते है पर विश्वास नहीं करते हैं,
    मैं उन लोगों के लिए मरना सिख रहीं हूं।।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...