कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- घरौंदा
शीर्षक- घरौंदा बनाने का संकल्प
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
मानव रूपयों के लालच में वादा तोड़ जाता है।
रिश्तों पर विश्वास नहीं भरोसा टूट जाता है।।
तेज हवा के झोकों से घरौंदा उड़ जाता है।
पंछी का सुंदर घरौंदा हवा बिखेर जाता है।।
मानव खुद के लिए सारे पेड़ काट जाता है।
जंगल के हरियाली को बंजर कर जाता है।।
ऑक्सीजन न मिले तो सांसें रूक जाता है।
जग सुंदर बनाने का सपना टूट जाता है।।
तेज धूप में पंछियों को ठिकाना मिल जाता है।
न रहे घरौंदा तो पंछी झुलस रह जाता है।।
जग के मानव नासमझी क्यों कर जाता है।
सुंदर बने घरौंदा को उजाड़ा क्यों जाता है।।
पंछी संरक्षण के लिए सकोरा बनाया जाता है।
प्यास बुझाने के लिए पानी रखा जाता है।।
'प्रिय' के हर बात को जग में फैलाया जाता है।
पंछियों को बचाने का संकल्प लिया जाता है।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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