नाम- हिम्मत सिंह अरमो "अरमान "।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विषय- प्रलय ।
शीर्षक- प्रलय की महिमा ।
विधा- छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल--6264189643 ।
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" प्रलय की महिमा "
धरा का प्रकटीकरण एक अजूबा--
प्रलय की ही परिणिति से उपजी ।
भौगोलिक भौतिकीय उथल-पुथल--
की एक अजीब सी कहानी है ।
वैदिक गणित, वैज्ञानिक सोच के साथ
जलमग्न धरा, तापीय प्रलय महिमा के
मौसम परिवर्तनों के हलचलों से--
समय काल की लम्बी यात्रा रफ्तार से,
जीव जंतु जगत का आधार बनी ।
प्रलय की महिमा विनाश-सृजन--
नव सृष्टि का रूपांतरण आकार है,
रोचक रहस्यों का भंडार है बनी ,
मानव विकास की गाथा है रची ,
कितनी सभ्यताओं का प्रादुर्भाव हुआ।
संस्कृति बोली भाषा ने आकार लिया--
सत्ता सियासत, जय-पराजय का,
साक्षात्कार है रही महाभारत हुआ,
अपनों से हक हठधर्मीता कथा रही।
प्रलय के प्रकोप के रूप हैं अनेक--
महामारी, जल-हवा और अग्नि प्रलय,
विज्ञान भी रहा नि:शब्द प्रहरी बन ,
प्रकृति प्रकोप से बेबस हम हो जाते।
विज्ञान के प्रयोग, मानव जीजिविषा--
फैला रही चमत्कार सुविधा व विनाशा,
अंधाधुंध संसाधनों का दोहन उपभोग,
बना रहे पर्यावरण प्रदूषण के सुयोग,
थमा नहीं ऐसे नित नये अनुप्रयोग ,
निश्चित ही विनाशकारी होगा तब योग।
सामाजिकता अराजकता जातीयता--
और मानव में विचारों का विद्वेषता ,
मैं, का सबमें पल रहा अमानवीयता,
शक्ति स्वरूपा युद्ध साधन की भव्यता,
एक दिन बनेंगी मानवता की अहंता ।
प्रलय की महिमा विनाश प्रकृति जाने-
धरा में आने का हम औचित्य को जाने
औरतों की महिमा व सृजन को जाने,
विश्व बंधुत्व संत दर्शन को हम जाने ,
जियो व जीने दो, विचारधारा को माने।
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