कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- चित्र आधारित
शीर्षक- तोर मया के रंग
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033
सुघ्घर तोर चुंदी ल करिया रहन दे।
चुंदी म सुघ्घर फूल खोंचाय रहन दे।
माथ म कौड़ी ल बंधाय रहन दे।
तोर होंठ के गुलाबी ल तँय रहन दे।।
तोर गला म सुतिया ल रहन दे।
तोर हाथ के भुजबंद ल रहन दे।।
सुघ्घर तोर मुस्कान ल रहन दे।
आँखी म थोरकन लाज रहन दे।।
गोरी सुघ्घर तन म सिंगार ल रहन दे।
गोरी तँय हाथ म चुरी ल रहन दे।।
सुघ्घर मया के आस ल मन म जगे रहन दे।
प्रिय बर मया के कुरिया ल खाली रहन दे।।
तोर मया के रंग म मोला रंगे रहन दे।
तोर गुरुतुर बोली म मोहा के रहन दे।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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