Saturday, July 29, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- तोर मया के रंग

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- चित्र आधारित 
शीर्षक- तोर मया के रंग
विधा- छंद मुक्त कविता
संपर्क- 7974389033

सुघ्घर तोर चुंदी ल करिया रहन दे।
चुंदी म सुघ्घर फूल खोंचाय रहन दे।

माथ  म  कौड़ी  ल  बंधाय  रहन  दे।
तोर होंठ के गुलाबी ल तँय रहन दे।।

तोर गला म  सुतिया  ल  रहन दे।
तोर हाथ के भुजबंद ल रहन दे।।

सुघ्घर तोर  मुस्कान  ल  रहन दे।
आँखी म थोरकन लाज रहन दे।।

गोरी सुघ्घर तन म सिंगार ल रहन दे।
गोरी तँय  हाथ म  चुरी  ल  रहन दे।।

सुघ्घर मया के आस ल मन म जगे रहन दे।
प्रिय बर मया के कुरिया ल खाली रहन दे।।

तोर मया के रंग  म  मोला रंगे रहन दे।
तोर गुरुतुर बोली म मोहा के रहन दे।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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