कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- कोपल
शीर्षक- कोपल एहसास
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033
*1- मानव*
वृक्ष लगाकर तू सदा, नीर धरती भिगोय।
हरियाली के छाँव में, मानव जीव सँजोय।।
*2- बीज*
निकला अंकुर बीज से, सुंदर सारे पान।
वृक्षों के पत्ते सदा, सबको देती जान।।
*3- कोपल*
सुंदर कोपल पत्तियां, देती सबको सांस।
गिरे पड़े हैं पत्तियां, कोपल की नव आस।।
*4- एहसास*
मन के कोमल भाव से, कोपल के एहसास।
वृक्ष पत्तियां साज के,देता है विश्वास।।
*5- औषधि*
हरियाली के रूप में, जग को देता छाँव।
वृक्ष के नई कोपलें, चला रही है नाव।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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