नाम-हिम्मतसिंह अरमो ।
जिला-रायपुर ।
राज्य-छत्तीसगढ़ ।
विषय- संग्रहालय ।
शीर्षक- संग्रहालय ।
विधा- छंद-मुक्त कविता ।
मोबाइल- 94252--02803
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संग्रहालय---
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कितनी हसीन होती है जिन्दगी--
मन में उथल-पुथल कर देती ,
विचारों का संग्रहालय उस पल ,
अपनों से दूर रहता, जब कोई ।
इतिहास के पन्नों को ताजा कर देती--
रखी संग्रहालय की हर चीज,
डूबो देती उस कालखंड में,
उभर कर सामने आ जाती हैं,
हर एक घटना सामने रोमांच के साथ ।
जिसने भी संग्रहण की आदत पाला--
चिंतनशील विचारों की बहती उसमें-- धारा ,विषय-विविधता का चढ़े पारा,
आत्म सुख का बनता ये खजाना ।
जिज्ञासु प्रवृत्ति को देती है खुराक--
गहनता में जानने की अमृत धारा,
बने पांडुलिपि इसका गूढ़ सहारा,
पुरातत्ववेत्ता की डायरी दे ज्ञान,
मिले संग्रहालय को तभी मान ।
मानववादी की सोच ने--
इतिहास की गर्भ से ढूंढ निकाला,
सामाजिकता को कैसे मिले सहारा,
सभी धर्मों का सम्मान का दे विचारा ,
बनाकर संस्कृति का संग्रहालय सारा।
आओ मिलकर अपना ज्ञान बढ़ावें --
संग्रहालय की महत्ता को बतावें ,
खुद लाभ उठावें औरों को भी सिखायें,
कल आज की वैभवता सामने लावें ।
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