Wednesday, July 5, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- भारत के प्रमुख संग्रहालय

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- संग्रहालय 
शीर्षक- भारत के प्रमुख संग्रहालय
विधा- छंद मुक्त कविता 
संपर्क- 7974389033

मन प्रफुल्लित हो गया, देख संग्रह स्थान।
सुंदर सारे चीज है, मूर्ति बना किसान।।1।।

संग्रहालय जनपथ का, दिल्ली में है आज।
भारत के सबसे बड़ा, संग्रहालयों नाज।।2।।

परंपराओं का बना, सुंदर सा तस्वीर।
 संग्रह,शोध प्रचार से, सजा है क्रांतिवीर।।3।।

अनेक स्मृतियों के साथ, है मूर्तियां संग।
संस्कृति से पहचान है, सुंदर दिखता रंग।।4।।

संग्रहालयों से हमें, मिला है विविध ज्ञान।
सुंदर करके काम को, पाये हम सम्मान।।5।।

प्रिय मन में सजा हुआ, संग्रहालय स्वरूप।
अब पुरानी यादें को, दो आईना रूप।।6।।

संग्रहालय बना हुआ, शिवा जी महाराज।
द प्रिंस ऑफ वेल्स है, एक अनमोल ताज।।7।।

सुंदर संग्रहालय ने, हमको किया प्रभाव।
सुंदर वादी में बना, मन में नहीं अभाव।।8।।

प्रसिद्ध केंद्रित रेल है, भारत में इतिहास।
विकास चरणों से बना,करो नहीं परिहास।।9।।

सात अजूबों के साथ, खड़ा सालार जंग।
संगमरमर मूर्ति है, आइवरी के संग।।10।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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