कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- नोटबंदी
शीर्षक- 2000 रुपये का नोट बंद
विधा- दोहा छंद
संपर्क- 7974389033
दो हजार के नोट हूँ; होने को हूँ बंद।
मिला नहीं इंसान को; नोटों का आनंद।।1।।
मानव मुझको पाय है; जब छपा दो हजार।
सभी लोग मुझको करें; लेने को इनकार।।2।।
दो हजार के नोट है; मुश्किलों की खान।
इसीलिए तो सब करें; सदा पाँच गुणगान।।3।।
बंद गुलाबी नोट से; लोगों में उल्लास।
यही गुलाबी नोट तो; बना नहिं कभी खास।।4।।
दो हजार के नोट से; लोग थे परेशान।
घर के बाहर है नहीं; दो का तो पहचान।।5।।
दो हजार के नोट का; मुशीबत पड़ा नाम।
मानव तो इस नोट से; घेले दु:ख तमाम।।6।।
मोदी के सरकार को; प्रिय करें आभार।
सारे मानव माँग से; बंद है दो हजार।।7।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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