Tuesday, May 16, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- आविष्कार एवं आविष्कारक

सुंदर आविष्कार से; मिला खुशियाँ अपार।
माँ ममता की रूप है; करती सबको प्यार।।1।।

जननी जीवन दायिनी; गर्भ रखे नौ मास।
सारे कष्टों को सहे; देती हमको सांस।।2।।

जग के आविष्कार को; मानव सुंदर साज।
मांँ बच्चों को पालती; सुंदर करना काज।।3।।

सुंदर से आकार में; बना हुआ है धाम।
करके आविष्कार तू; मिले जगत में नाम।।4।।

माता के वरदान से; मिलता कभी न हार।
करके आविष्कार तू; दिया हमें उपहार।।5।।
 
अद्भुत जग की शान में; काम होय साकार।
माँ की ममता है बड़ी; सबको करती प्यार।।6।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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