कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- शैल
शीर्षक- दरक रहें हैं शैल
संपर्क- 7974389033
सूरज तपती धूप से; दरक रहें हैं शैल।
खेतों में चलता नहीं; अब तो हल अरु बैल।।1।
सारे पौधे काट कर; बंजर हुआ पहाड़।
गिरता ऊँचे शैल से; हुआ बस्ती उजाड़।।2।।
धरती नहीं कठोर है; नेह-नीर अनुकूल।
पहाड़ में कैसे उगे; सारे सुंदर फूल।।3।।
मौसम के बदलाव से; नभ छाये घनघोर।
मात सीता को रावण; चुरा गये चितचोर।।4।
हिंद देश भूगोल का; रचा हुआ इतिहास।
मानव खुद में खो गया; करके वो परिहास।।5।।
ऊँचे खडे़ पहाड़ में; उगता हुआ पलाश।
मानव नैतिक भूल के; करता सत्यानाश।।6।।
पहाड़ से अनजान था; देख हुआ भयभीत।
निषाद इस संसार में; किसे बनायें मीत।।7।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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