Sunday, April 30, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- दरक रहें हैं शैल

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- शैल 
शीर्षक- दरक रहें हैं शैल 
संपर्क- 7974389033

सूरज तपती धूप से; दरक रहें हैं शैल।
खेतों में चलता नहीं; अब तो हल अरु बैल।।1।

सारे पौधे काट कर; बंजर हुआ पहाड़।
गिरता ऊँचे शैल से; हुआ बस्ती उजाड़।।2।।

धरती नहीं कठोर है; नेह-नीर अनुकूल।
पहाड़ में कैसे उगे; सारे सुंदर फूल।।3।।

मौसम के बदलाव से; नभ छाये घनघोर।
मात सीता को रावण; चुरा गये चितचोर।।4।

हिंद देश भूगोल का; रचा हुआ इतिहास।
मानव खुद में खो गया; करके वो परिहास।।5।।

ऊँचे खडे़ पहाड़ में; उगता हुआ पलाश।
मानव नैतिक भूल के; करता सत्यानाश।।6।।

पहाड़ से अनजान था; देख हुआ भयभीत।
निषाद इस संसार में; किसे बनायें मीत।।7।।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...