Friday, March 17, 2023

बलौदा बाजार से परमानंद निषाद'प्रिय' की रचना- जीवन एक दर्पण है

कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- दर्पण 
शीर्षक- जीवन एक दर्पण है
विधा- छंद मुक्त रचना 
संपर्क- 7974389033

जीवन एक दर्पण है; प्रेम सदा समर्पण।
देख कर सँवरता है; बढ़ा ही आकर्षण।1।

सूरत सीरत तो सदा; दर्पण में दिख जाय।
कर सोलह श्रृंगार से; नूर बढ़ा को पाय।2।

सभी मानव वाकिफ हैं;  जीवांत लोग दर्पण।
दुनिया भर देखे सदा; देकर अदा तर्पण।3।

सुंदर देखे अश्क का; करते सदा बखान।
देख कला के दर्पण से; मिलता ज्ञान विधान।4।

अभिनय करता देखके; दर्पण सारे लोग।
सुंदर दिखता रूप से; हरपल करता योग।5।

            परमानंद निषाद'प्रिय'
       ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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