कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- दर्पण
शीर्षक- जीवन एक दर्पण है
विधा- छंद मुक्त रचना
संपर्क- 7974389033
जीवन एक दर्पण है; प्रेम सदा समर्पण।
देख कर सँवरता है; बढ़ा ही आकर्षण।1।
सूरत सीरत तो सदा; दर्पण में दिख जाय।
कर सोलह श्रृंगार से; नूर बढ़ा को पाय।2।
सभी मानव वाकिफ हैं; जीवांत लोग दर्पण।
दुनिया भर देखे सदा; देकर अदा तर्पण।3।
सुंदर देखे अश्क का; करते सदा बखान।
देख कला के दर्पण से; मिलता ज्ञान विधान।4।
अभिनय करता देखके; दर्पण सारे लोग।
सुंदर दिखता रूप से; हरपल करता योग।5।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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