रचनाकार-गोमती सिंह
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-दर्पण
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-"चेहरा होता है दर्पण "
संपर्क नंबर-8103564763
------'हर इंसाँ का सच्चा दर्पण होता है,
उसका अपना चेहरा।
चाल चले वो लाख कोई
चढा ले रुपहला पर्दा ।
मगर हकीकत बयां कर जाता है,
उसका अपना चेहरा।
चाहे खुशियों का हो डेरा
या अंतर्मन में हो दुख का बसेरा,
दोनों ही सूरत कह जाता है
उसका अपना चेहरा।
ऐ इंसाँ! तू कुछ भी कह ले
झूठ को तू सच दिखा ।
दर्पण साफ साफ कहता है,
चेहरे पर है क्या लिखा!
-गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
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