राज्य -छ. ग.
जिला -बिलासपुर
विषय -मुक्तक
दिनांक -18-3-2023
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
शीर्षक -बेटे भी परदेश जाते है।
बेटी ही नही बेटे भी परदेश जाते है कभी नौकरी के कारण
तो कभी अपना रिश्ता निभाने के कारण
जाते है परदेश जीने के लिए कमाने के लिए
अपनो को पीछे कर अपनो से दूर अपनो के लिए
जो कभी काम ना करते थे घर के वो अब खुद को देखते है
कभी माँ पापा के लाडले अब समझदारी की बाते करते है
अकेले जीवन के झमेले खुद ही सुलझाते है
बेटी ही नही बेटे भी परदेश जाते है
ना माँ का आँचल होता है आँसू पोंछने
ना पापा का हौसला होता है सीख के लिए
फिर गिरते संभलते है बेटे भी परदेश जाते है।
साथ साथी हो तो भी ममता याद आती है।
खुद पिता बनते है तो पिता की बात याद आती है।
घर मे राजा बनने वाले बेटे की आँख परदेश मेभींग जाती है
ज़ब घर से दूर अपनो की याद आ जाती है
बेटी ही नही बेटे भी परदेश जाते है।
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
जिला -बिलासपुर छ. ग.
मो. न.7566685373
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