कवित्री-उर्मिला सिदार
जिला-रायगढ
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-दर्पण
शीर्षक-दर्पण
संपर्क न.-9303298994
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*दर्पण*
सोचा मैने आज फुर्सत में बैठकर,
देखलूँ दर्पण में तन स्वरूप आकार।
क्या देखुँ रूप में हरपल परिवर्तन है,
स्थायी आचरण पर नही जाता ध्यान।
दर्पण से मात्र तन का रूप दृष्टव्य है,
पता नही मन का गुणात्मक विकास।
इसी गुणात्मक की ह्रास से समाज,
आज वर्तमान में हो रहा परेशान।
दर्पण रूप की स्वरूप स्पष्ट बता देती,
जैसे बिंब बनता वैसे छवि दिखाती।
रहस्य नही रखती दर्पण स्पष्ट दर्शी,
जैसे रुप सजालोअपनी-अपनी मर्जी।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी
रायगढ छत्तीसगढ़
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