कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- नास्तिक
शीर्षक- नास्तिक
संपर्क- 7974389033
इंसानियत दुनिया में नहीं,
आस्तिक नहीं शैतान है।
ईश्वर पर विश्वास करें नहीं,
इंसान के रूप में हैवान है।
ईश्वर के सत्ता परलोक पर,
आस्तिक का कोई मोल नहीं।
धर्म के लिए बट रहे इंसान,
ईश्वर अब तो अनमोल नहीं।
पैसों के लिए बिक रहे इंसान।
इंसानियत सब भूलते जा रहे।
रब के द्वार जो भूख से मरता।
वो इंसान रब को भूल रहे।
आज अंधविश्वास का बोल बाला है।
नास्तिक करो तुम मन से विचार।
आस्तिक नास्तिक में अंतर समझो।
एक बार मन से रब का खोलो द्वार।
ईश्वर प्रेम से तुम कभी ना डरना।
एक बार आस्तिक को तुम जरूर मानना।
कुछ भी नहीं मिलता है नास्तिक से,
एक बार रब पर विश्वास तो करना।
सदा रखो मन में विश्वास।
तुम करो आस्तिक पे सवार।
एक बार छोड़ नास्तिक का डाली,
ईश्वर का मानना सदा आभार।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
No comments:
Post a Comment