नाम:एच-एस-अरमो "अरमान " ।
जिला:रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक: ग़ज़ल ।
विधा: छंद-मुक्त कविता ।
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$$$==ग़ज़ल ==$$$
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मुग़लों का,शौक रही हैं ग़ज़लें--
शराब, कबाब और शबाब के साथ,
मय व हुश्न का होता था जिक्र,
तारीफ सुनना था, बहुत पसंद ।।
ग़ज़ल पर्शियन और अरबी भाषा से--
उर्दू और हिन्दी आज उतर आयी,
पद्य में, ग़ज़ल का नूर बसा है,
हलके रागों व धुनों में गायी जाती है ।।
ग़ज़ल की विषयवस्तु व्यापक है--
इसके भीतर होता है, शब्दों का जाल,
मिले भावनाओं की अभिव्यक्ति तो,
मिले विरह और मिलन, तो--- कभी-कभी जमाने की शिकायत, तो
कभी-कभी तसव्वुफ़ व यथार्थ ज्ञान।।
शेरों-शायरी व ग़ज़ल के फनकार--
थे ग़ालिब, मीर,ज़ौक और दाग़,
नये दौर में गोरखपुरी, दुष्यंत कुमार,
ग़ज़ल गायकों ने सजाया महफिल,
ग़ज़लकारों के, चुनिंदा ग़ज़लों से ।।
ग़ज़ल की जान होती है--
मतला, मक़ता, काफिया और रदीफ़,
शब्दों के सही तौल, वजन, उच्चारण,
पर,आज नये फनकार, नियम तोड़ते,
बगैर मतला के ग़ज़ल हैं गाते--।।
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