रचनाकार-गोमती सिंह
जिला-कोरबा
राज्य-छत्तीसगढ़
विषय-ग़ज़ल
विधा-छंदमुक्त कविता
शीर्षक-ग़ज़ल
संपर्क नंबर-8103564763
दर्द-ए-दिल को रदीफ़ में बयाँ करने से बनती है गज़ल।
ख़ून-ए-जिगर को क़ाफिये में उतारो तो बनती है गज़ल।
टूटे दिल की अश'आर हुआ करती है गज़ल।
ज़माने से मिले ठोकर तो बनती है गज़ल।
पूछो दीवाने से कि क्या होती है गज़ल?
इक इकरार के इंतजार से बन जाती हैं गज़ल।
-गोमती सिंह
कोरबा,छत्तीसगढ़
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