कवि :- विनोद कुमार चौहान "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
राज्य :- छत्तीसगढ़
विषय :- व्यवहार
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- व्यवहार
जग से ज्यों तुम चाहते,
रख निज त्यों व्यवहार।
द्वेष भाव के बीज से,
कहां फले है प्यार।।१।।
सहज सरल जिसका यहां,
इस जग में व्यवहार।
आदर औ सम्मान ही,
मिले उसे उपहार।।२।।
तुनक मिजाजी हो अगर,
और बुरा व्यवहार।
कोई भी पूछें नहीं,
मनु जीवन बेकार।।३।।
मन निश्छल राखे सदा,
त्याग भाव प्रतिकार।
आते-जाते नित मिले,
उसे प्रेम व्यवहार।।४।।
जिनके सद व्यवहार है,
उनके लाखों यार।
रहे अकेला भीड़ में,
जिनके दुर्व्यवहार।।५।।
No comments:
Post a Comment