कवि- परमानंद निषाद'प्रिय'
जिला- बलौदा बाजार
राज्य- छत्तीसगढ़
विषय- सपना
शीर्षक- मेरे सपने
संपर्क- 797438903
उगते हुए सूरज का निकलना।
ढलती हुई सूरज की लाली।
फूलों का डाली पर मुरझा जाना।
हर गम को भूल कर आगे बढ़ना।
सपनों को सच कर दिखाना है।
कामयाबी के शिखर पर जाना है।
भारत को विकसित बनाना है।
नया इतिहास हमें रचना है।
दीन-दुखियों का सहारा बनकर ।
सभी को खाना हमें खिलाना है।
माँ-बाप का सहारा हमें बनना है।
गले लगाकर माँ-बाप का सेवा करना है।
सभी अशिक्षित लोगों को,
शिक्षित हमें करना है।
गली-चौराहों को स्वच्छ बनाकर।
हिन्दुस्तान को सुंदर बनाना है।
दहेज के कारण मारे जा रहे,
बहुओं को हमें बचाना है।
भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है,
भ्रष्टाचार हमें मिटाना है।
बेटा-बेटी में भेदभाव की सोच,
जड़ से खत्म हमें करना है।
भटक रहे लोगों को हमें,
सही राह दिखाना है।
'परमानंद' का यह सपना,
सच कर हमें दिखाना है।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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