Saturday, December 10, 2022

ओड़िशा से रोजी डड़सेना की रचना- आहट नहीं आगाज

शीर्षक - आहट नहीं आगाज ।   
 विधा- गजल 
 नाम - रोजी डड़सेना 
 पता   - दुन्गुरिपाली , सोनपुर, ओड़िशा.

 पतझड़ के सूखे पत्तों में, ये  कैसी सरसराहट है?
 लगता है बाघ ए जिंदगी में, किसी नए ख्वाब की आहट है ।  

 कटीली क्यारियों के झुरमुट से, हवाई पैगाम लाती है  ।
 नुकीली कांटो  मैं महीनों बाद , किसी गुलाब की आहट है ।

 जिंदगी गुजर गई, कोरे पन्ने जुड़ते जुड़ते
 एहसासों की खनक से आज, मुकम्मल किताब की आहट है ।

 मुद्दत से वीराने में, चीखते थे कुछ सवाल ।
 फिजाओं में आज उनके जवाब की आहट है ।
.
 गाड़ी अंधेरी लंबी रात के बाद,
 ये केसरिया नूर आफताब की आहट है ।

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