रचनाकार -उर्मिला सिदार
जिला-रायगढ
राज्य -छत्तीसगढ़
विधा-पद्य
शीर्षक-सपना
सम्पर्क-9303298994
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सपने देखने का अधिकार,
हर मानव के पास होता है।
सपने साकार करने के लिए,
ये खुशहाल जिंदगी होता है।
सपने सुहाने तभी लगते है,
जब सपने साकार होता है।
सपने कभी बिखर जाने से,
जिंदगी निरस व्यर्थ लगता है।
वर्तमान निरस जिंदगी में,
जीने का मजा कहाँ होता है।
टुटी सपनों की स्मृति में,
वह बार-बार आहे भरता है।
सपने देखना उनके लिए,
अब नामुमकिन होता है।
सपना अतंर्मन को तिरोहित कर,
विह्वल कर देता है।
सपने साकार न होने से,
मन कुंठित होता है।
सपने सपनें में न आये,
ऐसा कुंठित मन कहता है।
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उर्मिला सिदार बुलाँकी रायगढ छत्तीसगढ़
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