कवि -- चेतन सिंह
पता--- कसडोल,, छत्तीसगढ़
विषय - धूप
शीर्षक - एक अदद धूप
संपर्क -- 9202507146
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कंपकंपी सर्द में आसमां पर बादलों का राज है !
पगलाये मौसम का ये कैसा अजब अंदाज है !
तरसती है पानी के एक कतरे को भरी गर्मी में ,
आज वही तिनका बारिश के बूंदों से नाराज़ है !
दिसंबर ने ओढ़ ली जुलाई के रूप-प्रतिरूप को!
अचंभित हैं दुनिया देख मौसम के इस रूप को !
बेशर्म सर्द हवाएं बदन को छूकर यूं जा रही ,
तरस रही हर नैना देखने एक अदद धूप को !
बहुत व्याकुल है ये मन , बैरी ठिठुरन ठंड से !
बादलों की ओट में छुपा है धूप बड़े घमंड से !
धूप पर लिखी जा रही है आज कविताएं कई ,
धूप को गा रहा कोई गीत-गजल, कोई छंद से !
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